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IPL 2025: Dhoni की form पर Manoj Tiwary का तंज Stamina keeping में है, तो batting में क्यों नहीं दिखता

 

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आईपीएल 2025 में हालात दिन-ब-दिन चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। शनिवार, 5 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मिली 25 रनों की हार ने ना केवल टीम के प्रदर्शन को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी की बल्लेबाज़ी पर भी सवाल खड़े कर दिए। इस बार सवाल उठाने वाले कोई और नहीं, बल्कि भारत के पूर्व बल्लेबाज़ और बंगाल के मौजूदा क्रिकेट प्रशासक मनोज तिवारी हैं।

तीसरी लगातार हार, और बढ़ता दबाव

चेन्नई ने दिल्ली के खिलाफ 184 रनों का लक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन टीम निर्धारित 20 ओवरों में सिर्फ 158 रन ही बना सकी। धोनी ने नंबर 7 पर उतरते हुए 26 गेंदों में नाबाद 30 रन बनाए। उस समय रन रेट काफी अधिक था और उम्मीद की जा रही थी कि धोनी एक बार फिर ‘फिनिशर’ की भूमिका निभाएंगे। लेकिन इस पारी में ना आक्रामकता थी, ना इरादा, और यही बात क्रिकेट हलकों में चर्चा का विषय बन गई।

मनोज तिवारी का तंज

हिंदुस्तान टाइम्स के माध्यम से क्रिकबज़ पर बातचीत करते हुए मनोज तिवारी ने कहा:“जब आप पूरे 20 ओवर विकेट के पीछे खड़े रह सकते हैं, तो फिर बल्लेबाज़ी के दौरान 10 ओवर क्यों नहीं खेल सकते? अगर फिटनेस की बात है, तो यह एकतरफा नहीं हो सकती।”

तिवारी का यह बयान स्पष्ट रूप से धोनी की बल्लेबाज़ी के तरीके और उनकी भूमिका पर प्रश्न उठाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि धोनी को बल्लेबाज़ी में पूरी भूमिका नहीं निभानी है, तो उनकी जगह टीम में किसी युवा को मौका मिलना चाहिए।

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स्टीफन फ्लेमिंग की सफाई

चेन्नई सुपर किंग्स के मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने हाल ही में बयान दिया था कि धोनी, जो 2023 में घुटने की सर्जरी से गुज़रे हैं, अब लंबे समय तक बल्लेबाज़ी करने में शारीरिक रूप से सहज नहीं हैं। उन्होंने कहा:“हम धोनी से ज्यादा की उम्मीद नहीं रख सकते, उन्हें संभालकर इस्तेमाल करना होगा। उनका अनुभव अमूल्य है, लेकिन शरीर अब पहले जैसा नहीं रहा।”

यह बयान उन फैन्स और आलोचकों के लिए किसी हद तक संतोषजनक हो सकता है, लेकिन मैदान पर नतीजे और धीमी बल्लेबाज़ी शैली ने असंतोष की लहर ज़रूर पैदा की है।

धोनी का योगदान: अनुभव बनाम वर्तमान प्रदर्शन

एमएस धोनी आईपीएल इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं। उन्होंने चेन्नई को पाँच बार खिताब दिलाया है और टीम को एक ब्रांड बना दिया है। लेकिन अब जब उम्र का असर दिखाई देने लगा है, तो उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठने लाज़िमी हैं।

धोनी की मौजूदा बल्लेबाज़ी से ना तो विरोधी टीमों पर दबाव बनता है, और ना ही रन गति में इज़ाफा होता है। जबकि टीम को ऐसे मोड़ पर आक्रामक फिनिशर की सख्त ज़रूरत होती है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

धोनी के बल्लेबाज़ी क्रम और उनकी धीमी पारी को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं:

  • “धोनी को सिर्फ नाम के लिए नहीं, खेल के लिए मैदान पर होना चाहिए।”
  • “हमारे लिए धोनी भगवान हैं, लेकिन भगवान भी अब थकने लगे हैं।”
  • “अगर घुटने की सर्जरी के बाद लंबी बल्लेबाज़ी नहीं हो पा रही, तो फिर सही भूमिका तय करनी चाहिए।”
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कुछ फैन्स अब यह भी कहने लगे हैं कि धोनी को एक मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए, और किसी युवा को मुख्य फिनिशर के तौर पर उभारना चाहिए।

चेन्नई की चुनौती

आईपीएल 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स की स्थिति डांवाडोल है। टीम लगातार तीन मैच हार चुकी है और प्लेऑफ़ की दौड़ से धीरे-धीरे दूर होती नज़र आ रही है। ओपनिंग जोड़ी से लेकर मिडल ऑर्डर तक, हर क्षेत्र में अस्थिरता देखने को मिल रही है।

गेंदबाज़ी विभाग भी खासा असरदार नहीं रहा है। डैथ ओवरों में रन लीक होना और बीच के ओवरों में विकेट ना लेना टीम की कमजोरी बन चुकी है।

क्या अब बदलाव की ज़रूरत है?

मनोज तिवारी का बयान सिर्फ धोनी की फिटनेस पर नहीं, बल्कि टीम की सोच और रणनीति पर भी सवाल उठाता है। यदि धोनी सिर्फ विकेटकीपिंग और कप्तानी तक सीमित रहेंगे, तो क्या यह आईपीएल के इस तेज़ प्रारूप में काफी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि धोनी की विरासत महान है, लेकिन अब वक्त आ गया है जब टीम मैनेजमेंट को भावनाओं से ज़्यादा तथ्यों पर निर्णय लेने की आवश्यकता है।


एमएस धोनी आज भी करोड़ों दिलों की धड़कन हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट की रफ्तार उनके अनुभव से तेज़ चलने लगी है। मनोज तिवारी का यह तंज महज़ आलोचना नहीं, बल्कि एक संकेत है — उस बदलाव का जिसकी अब चेन्नई सुपर किंग्स को ज़रूरत है। चाहे वह बल्लेबाज़ी क्रम हो, कप्तानी की जिम्मेदारी हो या फिनिशिंग की भूमिका — अब समय है कुछ बड़ा निर्णय लेने का।


 

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