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विराट कोहली का टेस्ट से संन्यास: जब तुलना होती थी सर विवियन रिचर्ड्स से जानिए आंकड़ों का फुल मुकाबला

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक और अध्याय खत्म हो गया जब विराट कोहली ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। 36 वर्षीय कोहली, जो कभी भारतीय टेस्ट टीम की धड़कन माने जाते थे, अब लाल गेंद के क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं। पहले से ही रोहित शर्मा टेस्ट से संन्यास ले चुके थे, ऐसे में आगामी इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम को दो बड़े दिग्गजों की कमी खलेगी।

विराट कोहली की टेस्ट यात्रा

कोहली हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का हिस्सा थे, जहां उन्होंने पर्थ टेस्ट में शानदार शतक जमाकर जता दिया कि उनकी क्लास अब भी ज़िंदा है। लेकिन बाकी टेस्ट मुकाबलों में वे निरंतरता नहीं दिखा पाए और बाहरी ऑफ स्टंप पर लगातार आउट होते रहे। इस सीरीज में उन्होंने 9 पारियों में सिर्फ 190 रन बनाए, औसत रहा मात्र 23.75, जो उनके करियर के स्तर के हिसाब से बेहद फीका रहा।

विराट कोहली बनाम सर विवियन रिचर्ड्स: आंकड़ों की टक्कर

कोहली का नाम जब टेस्ट क्रिकेट में लिया जाता है, तो उनकी तुलना वेस्ट इंडीज़ के दिग्गज सर विवियन रिचर्ड्स से की जाती रही है। दोनों ही बल्लेबाज़ आक्रामक शैली के लिए जाने जाते थे, जो गेंदबाज़ों पर हावी होकर खेलते थे।

विराट कोहली (Test Career):

  • मैच: 113
  • रन: 8,848
  • औसत: 49.15
  • सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 254*
  • शतक: 29
  • अर्धशतक: 30

सर विवियन रिचर्ड्स (Test Career):

  • मैच: 121
  • रन: 8,540
  • औसत: 50.23
  • सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 291
  • शतक: 24
  • अर्धशतक: 45

इन आंकड़ों से साफ है कि दोनों ने लगभग समान स्तर पर परफॉर्म किया है। कोहली ने जहां तकनीकी पर अधिक भरोसा किया, वहीं रिचर्ड्स अपनी ताकत और एटिट्यूड से खेल को नियंत्रित करते थे। कोहली ने कई कठिन दौरों पर टीम इंडिया को जीत दिलाई, खासकर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में उनकी कप्तानी और बल्लेबाज़ी हमेशा चर्चा में रही।

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टेस्ट क्रिकेट में कोहली की पहचान

कोहली ने अपने करियर की शुरुआत 2011 में वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ की थी। लेकिन उनका असली कमाल तब दिखा जब उन्होंने 2014 के बाद कप्तानी संभाली और टेस्ट क्रिकेट को एक नई दिशा दी। फिटनेस, आक्रामकता और विदेश में जीतने की भूख—ये सब कोहली के टेस्ट युग की पहचान बनी।

2016 से 2019 तक का दौर विराट कोहली के टेस्ट करियर का सुनहरा समय था, जहां उन्होंने लगातार रन बनाए और भारत को टेस्ट रैंकिंग में टॉप तक पहुंचाया।

कोहली बनाम रिचर्ड्स: मानसिकता की तुलना

विवियन रिचर्ड्स ने टेस्ट क्रिकेट को एक शो के रूप में खेला—फैंस के लिए, स्टाइल के लिए। वहीं कोहली ने इसे एक मिशन के रूप में अपनाया—हर टेस्ट में जीत, हर रन में जुनून।

दोनों ही खिलाड़ियों की तुलना करना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि दो क्रिकेटिंग आइकन की सोच, शैली और प्रभाव का प्रदर्शन है। जहां रिचर्ड्स ने अपने समय में बैकफुट पर डॉमिनेट किया, वहीं कोहली ने कवर ड्राइव और रनिंग बिटवीन द विकेट्स के जरिए गेम को कंट्रोल किया।


 

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